
शहडोल से पंडित कृष्णा मिश्रा की रिपोर्ट
22 अक्टूबर 2026
अभाविप ने विश्वविद्यालय द्वारा घोषित प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम में व्याप्त गंभीर अनियमितताओं को लेकर कुलगुरु को सौंपा ज्ञापन
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एक राष्ट्रवादी छात्र संगठन है, जो विद्यार्थियों के हितों, राष्ट्रहित एवं समाजहित के लिए निरंतर कार्य करता आ रहा है। इसी क्रम में पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय, शहडोल द्वारा घोषित प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के संबंध में विद्यार्थी परिषद आपका ध्यान आकृष्ट कराते हुए विद्यार्थियों के हित में तत्काल एवं उचित कार्यवाही की माँग करती है।
विश्वविद्यालय द्वारा घोषित परीक्षा परिणामों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को पूरक (सप्लीमेंट्री/ATKT) घोषित किया गया है। इससे विद्यार्थियों में असंतोष एवं असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। परीक्षा परिणामों में लगातार सामने आ रही समस्याएँ विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य, आर्थिक स्थिति एवं मानसिक तनाव को प्रभावित कर रही हैं। यह स्थिति विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
अतः विद्यार्थी परिषद निम्नलिखित बिंदुओं पर आपका ध्यान आकृष्ट कराते हुए त्वरित कार्यवाही की माँग करती है—

- प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम की पुनः जाँच एवं पुनर्मूल्यांकन किया जाए।विश्वविद्यालय एवं उससे संबद्ध महाविद्यालयों के प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम में लगभग 80 प्रतिशत विद्यार्थियों के पूरक (सप्लीमेंट्री/ATKT) होने की जानकारी सामने आई है। इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का पूरक होना गंभीर चिंता का विषय है।
अतः सभी संबंधित विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं की निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से पुनः जाँच कराई जाए तथा त्रुटियों का निराकरण करते हुए संशोधित परीक्षा परिणाम शीघ्र जारी किया जाए। - उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
गत वर्ष भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के पूरक होने का मामला सामने आया था। उस समय विद्यार्थी परिषद द्वारा इस विषय को विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष उठाया गया था। उत्तरपुस्तिकाओं को जबलपुर भेजकर मूल्यांकन कराए जाने के संबंध में भी आपत्ति व्यक्त की गई थी तथा इस व्यवस्था पर पुनर्विचार का आश्वासन दिया गया था।
इसके बावजूद उत्तरपुस्तिकाएँ जबलपुर भेजे जाने की प्रक्रिया जारी रहने की जानकारी मिल रही है। अतः मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्ष जाँच कराई जाए तथा ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे मूल्यांकन में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं त्रुटिरहित परिणाम सुनिश्चित हो सकें। - विद्यार्थियों के लिए लेजर एवं अंक विवरण की उचित व्यवस्था की जाए।
विश्वविद्यालय को संबद्धता एवं परीक्षा संचालन की व्यवस्था स्थापित हुए तीन वर्ष हो चुके हैं, किंतु विद्यार्थियों को अपने प्राप्तांक देखने तथा उनका सत्यापन करने के लिए उचित एवं सुलभ व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने की समस्या सामने आ रही है।
अतः अन्य विश्वविद्यालयों की तर्ज पर विद्यार्थियों को विषयवार प्राप्तांक, मूल्यांकन विवरण एवं आवश्यक अंक अभिलेख उपलब्ध कराने हेतु तत्काल उचित व्यवस्था की जाए, जिससे विद्यार्थी अपने अंकों का सत्यापन कर सकें तथा किसी त्रुटि की स्थिति में नियमानुसार शिकायत दर्ज करा सकें। - कंप्यूटर साइंस मेजर प्रथम प्रश्नपत्र से संबंधित मामले की जाँच की जाए।
कंप्यूटर साइंस मेजर प्रथम का प्रश्नपत्र कथित रूप से विश्वविद्यालय की त्रुटि के कारण पूर्णतः अंग्रेजी भाषा में आया था, जबकि इससे संबंधित विद्यार्थियों को भाषा के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
वर्तमान परीक्षा परिणाम में भी इस विषय में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के पूरक होने की जानकारी सामने आई है। अतः प्रश्नपत्र की भाषा, निर्धारित पाठ्यक्रम, परीक्षा संबंधी निर्देशों एवं मूल्यांकन प्रक्रिया की जाँच कर विद्यार्थियों को नियमानुसार राहत प्रदान की जाए।
किसी भी प्रशासनिक त्रुटि का दुष्परिणाम विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए। - पूरक परीक्षा शुल्क में उचित कमी की जाए।
विश्वविद्यालय द्वारा पूरक परीक्षा के नाम पर विद्यार्थियों से ₹1,600 शुल्क लिया जा रहा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर एवं सामान्य परिवारों के विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है।
अतः विद्यार्थी परिषद माँग करती है कि पूरक परीक्षा शुल्क की समीक्षा करते हुए इसे ₹1,600 से घटाकर ₹600 किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को आर्थिक राहत मिल सके। साथ ही शुल्क निर्धारण का स्पष्ट आधार भी सार्वजनिक किया जाए। - परीक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जाँच कर आवश्यक प्रशासनिक सुधार किए जाएँ।
पिछले तीन वर्षों से परीक्षा परिणामों में लगातार गंभीर अनियमितताओं एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के पूरक होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
इस स्थिति में परीक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन, अंक प्रविष्टि एवं परीक्षा परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए।
यदि किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी की लापरवाही या अनियमितता प्रमाणित होती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। आवश्यकता के अनुसार परीक्षा विभाग में प्रशासनिक बदलाव करते हुए जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, जिससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता स्थापित हो तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक लग सके। - अनुपस्थित दर्शाए गए विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम में तत्काल सुधार किया जाए।
हाल ही में घोषित परीक्षा परिणाम में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें परीक्षा में सम्मिलित होने के बावजूद विद्यार्थियों को अनुपस्थित (Absent) दर्शाते हुए पूरक घोषित कर दिया गया है।
इसी प्रकार, सीसी एवं प्रायोगिक परीक्षाओं में उपस्थित रहने के बावजूद विद्यार्थियों को अनुपस्थित दर्शाए जाने की शिकायतें भी प्राप्त हुई हैं। यह अत्यंत गंभीर विषय है, क्योंकि ऐसी त्रुटियों से विद्यार्थियों का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो सकता है।
अतः संबंधित उपस्थिति अभिलेखों, परीक्षा रिकॉर्ड एवं प्रायोगिक अंकों का तत्काल सत्यापन कराकर तीन दिवस के भीतर सभी प्रमाणित त्रुटियों का निराकरण किया जाए तथा संशोधित परिणाम जारी किया जाए।
अतः विद्यार्थी परिषद की प्रमुख माँगें निम्नलिखित हैं—
सभी संबंधित परीक्षा परिणामों की निष्पक्ष जाँच कराकर पुनर्मूल्यांकन की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन एवं परीक्षा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए।
अनुपस्थित, गलत अंक प्रविष्टि एवं अन्य तकनीकी त्रुटियों का तीन दिवस के भीतर निराकरण किया जाए।
पूरक परीक्षा शुल्क घटाकर ₹600 किया जाए।
परीक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जाँच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सभी माँगों पर सात दिवस के भीतर ठोस निर्णय लेकर विद्यार्थी परिषद को लिखित रूप में अवगत कराया जाए।
महोदय, विद्यार्थियों का भविष्य किसी भी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही अथवा मूल्यांकन संबंधी त्रुटियों के कारण संकट में नहीं पड़ना चाहिए। विश्वविद्यालय का दायित्व केवल परीक्षा आयोजित करना एवं परिणाम घोषित करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को निष्पक्ष मूल्यांकन, पारदर्शी व्यवस्था एवं न्यायसंगत अवसर उपलब्ध कराना भी है।
अतः आपसे अपेक्षा है कि इस विषय को गंभीरता से लेते हुए विद्यार्थियों के हित में तत्काल प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे।
यदि निर्धारित समयावधि में उपरोक्त माँगों पर ठोस एवं संतोषजनक कार्यवाही नहीं की जाती है, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विद्यार्थियों के हितों की रक्षा हेतु लोकतांत्रिक एवं चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर विरोध प्रदर्शन भी किया जाएगा। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। ज्ञापन देते समय जिला संयोजक अमन त्रिपाठी, निधि पांडेय, गौरव मिश्रा, विक्रांत शर्मा, अमन यादव, जीतू यादव, अभिषेक यादव, खुशी सिंह, आंचल कोल, परिषद के कार्यकर्ता एवं विश्वविद्यालय के छात्र_छात्रा उपस्थित
